आगामी
परमा एकादशी
व्रत: 11 जून, 2026
तिथि की शुरुआत :
11 जून 2026, 12:57 AM.
तिथि की समाप्त :
11 जून 2026, 10:36 PM.
पारण:
समय: 12 जून - 05:23 AM से 10:02 AM
पाण्डव निर्जला एकादशी
व्रत: 25 जून, 2026
तिथि की शुरुआत :
24 जून 2026, 06:12 PM.
तिथि की समाप्त :
25 जून 2026, 08:09 PM.
पारण:
समय: 26 जून - 05:25 AM से 10:04 AM
योगिनी एकादशी
व्रत: 11 जुलाई, 2026
तिथि की शुरुआत :
10 जुलाई 2026, 08:16 AM.
तिथि की समाप्त :
11 जुलाई 2026, 05:22 AM.
पारण:
समय: 12 जुलाई - 05:32 AM से 10:08 AM

Loading latest video...

आध्यात्मिक कथा वाचक

आपके मार्गदर्शन हेतु अनुभवी और प्रेरक वक्ता

LIVE :
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री - Dheerendra Krishna Shastri

करीब 300 साल पहले जिस मानव कल्याण और जनसेवा की परंपरा को सन्यासी बाबा ने शुरु किया था, अब इसी परंपरा को और आगे बढ़ा रहे हैं बालाजी महाराज के कृपा पात्र, श्री दादा गुरुजी महाराज के उत्तराधिकारी पूज्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, जिसे पूरी दुनिया बागेश्वर धाम सरकार के नाम से संबोधत करती है। भक्तों का कष्ट हरने भगवान खुद इस धरती पर नहीं विराजते बल्कि अपने किसी दूत को भेजते हैं। बागेश्वर धाम सरकार, बालाजी के वो भक्त हैं जिनपर उनकी असीम कृपा है। यहां जो भी बालाजी महाराज की शरण में अपनी मनोकामना लेकर आता है, बालाजी महाराज अपने परम भक्त बागेश्वर धाम सरकार के माध्यम से उसे पूर्ण करवाते हैं। बालाजी महाराज के आशीर्वाद से महाराज श्री बागेश्वर धाम सरकार की ख्याति की गवाही तो उनकी कथाओं और उनके दरबारों में श्रद्धालुओं भारी भीड़ देती है। महाराज श्री के दर्शन और उनकी एक झलक पाने के लिए ना जाने कहां कहां से श्रद्धालुगण देशभर में हो रही इनकी कथाओं में पहुंचते हैं और उनकी दिव्यवाणी का श्रवण करते हैं। 4 जुलाई 1996 को मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के ग्राम गढ़ा में सरयूपारीय ब्रह्मण परिवार में पिता श्री रामकृपाल जी महाराज और भक्तिमति माता सरोज के परिवार में जन्मे पूज्य गुरुदेव का बचपन गरीबी और  तंगहाली में बीता। कर्मकांडी ब्राह्ण का परिवार था, तो पूजा पाठ में जो दक्षिणा मिल जाती उसी से 5 लोगों का परिवार चलता। ऐसे में पूज्य महाराज श्री को अपनी शिक्षा भी अधुरी छोड़नी पड़ी। तीन भाई-बहन में सबसे बड़े गुरुदेव का पूरा बचपन अपने परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था करने में ही गुज़र गया। लेकिन एक दिन बालाजी महाराज की आज्ञा और कृपा से उन्हें उनके दादा जी श्री श्री 1008 दादा गुरु जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ और दादा गुरु के आशिर्वाद और आदेश से महाराज श्री बालाजी महाराज की सेवा में जुट गए। सन्यासी बाबा और इस धाम की महिमा को दुनिया भर में फैलाया और आज इसका नतीजा है धाम पर हर मंगलवार और शनिवार को पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़। जनकल्याण और समाज कल्याण के कार्यों के क्रम में जिस तरह से मानव जाति का कल्याण होता आया है, इसके लिए युगों युगों तक गुरुदेव के संकल्प और उनकी कीर्ति याद रखी जाएगी। अपने लिए ना जी कर दूसरों के लिए जीये, दूसरों के लिए कुछ करने के संकल्प के साथ अपना पूरा समय मानवता की सेवा में दे, ऐसे महापुरुष संत को बारम बार नमन…

 धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री - Dheerendra Krishna Shastri

LIVE :
अच्छर्या कौशिक महाराज - Shri Acharya Kaushik Maharaj

आचार्य कौशिक महाराज जी भारत के प्रसिद्ध कथावाचक, आध्यात्मिक गुरु और धार्मिक प्रवचनकर्ता हैं। वे मुख्य रूप से श्रीमद् भागवत कथा और राम कथा के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रवचन भक्ति, संस्कार और सनातन धर्म पर आधारित होते हैं। जन्म एवं प्रारंभिक जीवन आचार्य कौशिक महाराज जी का जन्म 26 मार्च 1974 को उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले के तासौड़ गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव धर्म और साधु-संतों की ओर था। आध्यात्मिक मार्ग उन्होंने वेद-पुराण, शास्त्र और सनातन धर्म का अध्ययन किया। साधु-संतों के सान्निध्य में रहकर उन्होंने आध्यात्मिक जीवन को अपनाया और कथा वाचन को अपना मार्ग बनाया। गुरु परंपरा आचार्य कौशिक महाराज जी के गुरु परम पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरि जी महाराज हैं। वे गुरु-शिष्य परंपरा को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं। सामाजिक एवं सेवा कार्य आचार्य कौशिक महाराज जी तुलसी तपोवन गौशाला जैसी संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और सेवा कार्यों में सक्रिय रहते हैं। वे सेवा को ही सच्ची भक्ति मानते हैं। कथा वाचन और पहचान आज वे देश-विदेश में श्रीमद् भागवत कथा राम कथा धार्मिक प्रवचन करते हैं। उनकी वाणी सरल, भावपूर्ण और सभी को समझ आने वाली होती है।

अच्छर्या कौशिक महाराज - Shri Acharya Kaushik Maharaj

प्रेमानंद जी महाराज - Premanand Ji Maharaj

परिचय श्री प्रेमानंद जी महाराज एक प्रसिद्ध भारतीय आध्यात्मिक गुरु, संत और भक्तिमार्ग के उच्च कोटि के प्रवक्ता हैं। वे राधावल्लभ संप्रदाय से जुड़े रसिक संत हैं और राधा-कृष्ण प्रेम-भक्ति, नाम-स्मरण, ब्रह्मचर्य और सेवा को जीवन का मूल आधार मानते हैं। उनकी साधना, शिक्षाएँ और जीवन-शैली आज के समय में भक्ति मार्ग का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। माता-पिता एवं प्रारंभिक संस्कार श्री प्रेमानंद जी महाराज का जन्म एक संस्कारवान परिवार में माता श्रीमती रमा देवी और पिता श्री शंभू पांडे के घर हुआ। बाल्यकाल से ही उन्हें धार्मिक वातावरण, सादगी और नैतिक मूल्यों के संस्कार प्राप्त हुए। बचपन से उनका झुकाव ईश्वर-भक्ति, साधना और आत्मिक चिंतन की ओर था। संन्यास ग्रहण केवल 13 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने सांसारिक जीवन का परित्याग कर संन्यास मार्ग को अपनाया। यह निर्णय उनके भीतर विद्यमान गहरी वैराग्य भावना और ईश्वर-प्राप्ति की तीव्र आकांक्षा का परिचायक था। संन्यास पथ पर उन्हें प्रारंभ में आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी नाम प्राप्त हुआ तथा आगे चलकर महावाक्य और संन्यासी जीवन स्वीकार करने के बाद वे स्वामी आनंदाश्रम कहलाए। साधना एवं तपस्वी जीवन श्री प्रेमानंद जी महाराज ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण काल वाराणसी में गंगा तट पर कठोर साधना में व्यतीत किया। वे लंबे समय तक एक पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यान, मौन और आत्मचिंतन में लीन रहे। इसी अवधि में संत पंडित स्वामी श्री राम शर्मा जी के सान्निध्य ने उनके आध्यात्मिक मार्ग को और अधिक दृढ़ किया। गुरु परंपरा एवं दीक्षा उन्हें राधावल्लभ संप्रदाय के एक गोस्वामी द्वारा “शरणागति मंत्र” के माध्यम से दीक्षित किया गया। इसके पश्चात वे अपने परम गुरु श्री हित गौरांगी शरण जी महाराज (बड़े गुरुजी) के सान्निध्य में पहुँचे। गुरुजी से उन्हें “निज मंत्र” की दीक्षा प्राप्त हुई, जो सहचरी भाव और नित्य विहार रस पर आधारित है। इसी के साथ वे रसिक संत परंपरा के आधिकारिक साधक बने। वृंदावन से विशेष आत्मिक संबंध श्री प्रेमानंद जी महाराज का वृंदावन से अत्यंत गहरा आत्मिक संबंध है। वे वृंदावन को केवल निवास स्थान नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण की लीलाभूमि और साधना की पूर्ण स्थली मानते हैं। उनका विश्वास है कि वृंदावन में किया गया नाम-स्मरण और भक्ति साधना साधक के जीवन को शीघ्र आध्यात्मिक दिशा प्रदान करती है। श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट वर्ष 2016 में स्थापित श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट, वृंदावन एक गैर-लाभकारी संस्था है। ट्रस्ट का उद्देश्य भक्ति के साथ-साथ सेवा के माध्यम से समाज का उत्थान करना है। ट्रस्ट द्वारा प्रमुख सेवाएँ तीर्थयात्रियों हेतु आवास निःशुल्क भोजन व्यवस्था वस्त्र एवं आवश्यक सामग्री चिकित्सा सहायता साधु एवं निर्धन सेवा शिक्षाएँ एवं दर्शन श्री प्रेमानंद जी महाराज की शिक्षाओं के प्रमुख आधार हैं: हरिनाम जप और राधा-कृष्ण प्रेम-भक्ति आडंबर से दूर, अंतःशुद्धि पर बल गुरु-निष्ठा को आध्यात्मिक जीवन की रीढ़ मानना अहंकार, ईर्ष्या और दिखावे से दूर रहना ब्रह्मचर्य और संयम को आध्यात्मिक शक्ति मानना उनका स्पष्ट संदेश है: “ईश्वर को पाने का सबसे सरल और शुद्ध मार्ग प्रेम है, न कि केवल कर्मकांड।” ब्रह्मचर्य एवं संयम का व्यावहारिक दृष्टिकोण वे ब्रह्मचर्य को केवल संन्यासियों तक सीमित नहीं मानते। उनके अनुसार गृहस्थ जीवन में भी इंद्रिय संयम विचारों की पवित्रता अनुशासित दिनचर्या आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत आवश्यक है। मौन, एकांत और सादगी श्री प्रेमानंद जी महाराज का जीवन अत्यंत सादा, मौनप्रिय और एकांत साधनामय रहा है। वे मंचीय दिखावे, अनावश्यक प्रसिद्धि, विवादों और राजनीति से सदैव दूर रहते हैं। युवाओं के लिए संदेश युवाओं को वे विशेष रूप से प्रेरित करते हैं कि: जीवन को लक्ष्यहीन न बनाएं नशा, भोग और मोबाइल-आसक्ति से बचें कम उम्र से नाम-स्मरण और सदाचार अपनाएँ ऊर्जा को साधना और सेवा में लगाएँ

प्रेमानंद जी महाराज - Premanand Ji Maharaj

देवी चित्रलेखा - Shri Devi Chitralekha

संक्षिप्त परिचय देवी चित्रलेखा जी भारत की प्रसिद्ध युवा कथावाचिका और आध्यात्मिक वक्ता हैं। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा और भक्ति मार्ग के माध्यम से देश-विदेश में लाखों भक्तों को प्रभु भक्ति से जोड़ा और व्यापक श्रद्धा प्राप्त की। पारिवारिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि देवी चित्रलेखा जी एक संस्कारवान ब्राह्मण परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता, श्री टीकाराम शर्मा और श्रीमती चमेली देवी, उन्हें बचपन से ही धर्म, भक्ति और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देते रहे। दादा-दादी से उन्हें गहरे आध्यात्मिक संस्कार विरासत में मिले, और ब्रज क्षेत्र की दिव्य संस्कृति ने उनके व्यक्तित्व को प्रारंभ से ही आध्यात्मिक दिशा दी। उनका एक भाई प्रत्यक्ष शर्मा है। दीक्षा और प्रारंभिक प्रवचन केवल 4 वर्ष की आयु में उन्हें गौड़ीय वैष्णव परंपरा में दीक्षा प्राप्त हुई। 6 वर्ष की उम्र में बरसाना में दिया गया उनका पहला सार्वजनिक प्रवचन सभी को मंत्रमुग्ध कर गया। इसके बाद वृंदावन के समीप तपोवन में उनकी पहली 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसने उनके कथा जीवन की मजबूत नींव रखी। विशेष प्रतिभा और शिक्षा देवी चित्रलेखा जी ने औपचारिक रूप से कहीं से कथा या संगीत का प्रशिक्षण नहीं लिया, फिर भी वे कथा वाचन, भजन गायन और हारमोनियम वादन में अद्भुत निपुणता रखती हैं। वे शिक्षा के महत्व को भी समझती हैं और उन्होंने सामान्य पब्लिक स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी कर सांसारिक और आध्यात्मिक ज्ञान के बीच संतुलन बनाए रखा। विवाह और पारिवारिक जीवन 23 मई 2017 को देवी चित्रलेखा जी का विवाह माधव प्रभु जी (माधव तिवारी) से हरियाणा के पलवल में संपन्न हुआ। माधव प्रभु जी मूल रूप से बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और आध्यात्मिकता में गहरी आस्था रखते हैं। यह दंपति मिलकर समाज और धर्म सेवा में सक्रिय योगदान दे रहा है। सेवा कार्य और जीवन उद्देश्य देवी चित्रलेखा जी ने गौ सेवा धाम की स्थापना कर बीमार और घायल गायों की सेवा का कार्य प्रारंभ किया। इसके साथ-साथ वे संकीर्तन यात्राओं के माध्यम से भारत सहित अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और अफ्रीका जैसे देशों में भी भक्ति कार्यक्रम आयोजित करती हैं। उनका जीवन उद्देश्य राधा-कृष्ण भक्ति और हरे कृष्ण महामंत्र को पूरे विश्व में फैलाना है, जिसे वे गुरु आज्ञा के अनुसार पूर्ण समर्पण भाव से निभा रही हैं।

देवी चित्रलेखा - Shri Devi Chitralekha

पंडित प्रदीप मिश्रा - Pandit Pradeep Mishra

पंडित प्रदीप मिश्रा जी (जन्म: 16 जून 1977) भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता, कथावाचक और शिव भक्त हैं। वे शिव महापुराण पर आधारित अपने सरल, भावपूर्ण और जनसामान्य को समझ आने वाले प्रवचनों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि पंडित प्रदीप मिश्रा जी का जन्म मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता श्री रमेश्वर दयाल मिश्रा आजीविका के लिए सड़क विक्रेता थे। सीमित साधनों के बावजूद परिवार में धार्मिक संस्कार और आध्यात्मिक वातावरण रहा। शिक्षा एवं प्रारंभिक रुचि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीहोर में ही प्राप्त की और स्नातक (Graduation) तक अध्ययन किया। बचपन से ही उनका झुकाव धर्म, भक्ति और शास्त्रों की ओर था, जिसने आगे चलकर उनके आध्यात्मिक जीवन की दिशा तय की। आध्यात्मिक दीक्षा एवं मार्गदर्शन पंडित प्रदीप मिश्रा जी को इंदौर में गोवर्धन नाथ जी से दीक्षा प्राप्त हुई। दीक्षा के पश्चात उन्होंने पुराणों, विशेषकर शिव महापुराण का गहन अध्ययन किया और शिव भक्ति को अपने जीवन का केंद्र बनाया। आजीविका से आध्यात्मिक सेवा तक उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्कूल शिक्षक के रूप में की। बाद में उन्होंने सांसारिक कार्य छोड़कर पूर्णकालिक रूप से धार्मिक प्रवचन और कथा वाचन को अपनाया। प्रारंभ में उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा कही, फिर पूरी तरह शिव महापुराण पर केंद्रित हो गए। कुबेरेश्वर धाम, सीहोर पंडित प्रदीप मिश्रा जी कुबेरेश्वर धाम, सीहोर के मुख्य पुजारी हैं। यह धाम आज शिव भक्तों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक आस्था केंद्र बन चुका है, जहाँ शिव महापुराण कथा और रुद्राक्ष महोत्सव जैसे विशाल धार्मिक आयोजन होते हैं। “सीहोर वाले बाबा” के रूप में पहचान डिजिटल माध्यमों जैसे यूट्यूब और फेसबुक के ज़रिए वे देश-विदेश में प्रसिद्ध हुए। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान उनके प्रवचनों ने लाखों लोगों को आध्यात्मिक संबल और सकारात्मक दृष्टि प्रदान की, जिससे वे “सीहोर वाले बाबा” के नाम से लोकप्रिय हुए। सामाजिक एवं धार्मिक कार्य उन्होंने श्री विठ्ठलेश सेवा समिति की स्थापना की, जो कथा आयोजन, भंडारे, सेवा कार्य और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे सामाजिक-धार्मिक कार्यों में सक्रिय है। उनका उद्देश्य सेवा, संस्कृति और सनातन मूल्यों का संरक्षण है। सम्मान एवं उपलब्धियाँ वर्ष 2022 में, उनके एक आध्यात्मिक कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को एकसाथ लाखों लोगों द्वारा देखे जाने के कारण उनका नाम वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड्स, लंदन में दर्ज किया गया। व्यक्तित्व एवं संदेश पंडित प्रदीप मिश्रा जी की पहचान उनकी सादगी, स्पष्ट वाणी और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा से है। वे अपने प्रवचनों के माध्यम से अध्यात्म को जीवन से जोड़कर नैतिक मूल्यों, सकारात्मक सोच और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का संदेश देते हैं।

 पंडित प्रदीप मिश्रा - Pandit Pradeep Mishra

इंद्रेश उपाध्याय - Shri Indresh Upadhyay

श्री इंद्रेश उपाध्याय जी, श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुरजी के सुपुत्र एवं भक्तिपथ के संस्थापक हैं। वे एक विनम्र और प्रेरणादायक आध्यात्मिक प्रवक्ता हैं, जिनकी शिक्षाएँ लोगों को भक्ति, सेवा और सही जीवन मार्ग की ओर प्रेरित करती हैं। उनके माध्यम से श्रीमद्भागवत कथा का संदेश सरल भाषा में जन-जन तक पहुँच रहा है। शिक्षा उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कान्हा माखन पब्लिक स्कूल से प्राप्त की। इंद्रेश उपाध्याय जी एक प्रसिद्ध और प्रतिभाशाली कथा-वाचक हैं। उनकी मधुर आवाज़ और सरल कथा शैली श्रोताओं के मन को छू जाती है और उन्हें भगवान की भक्ति से जोड़ देती है। श्री इंद्रेश उपाध्याय जी का जन्म एक धार्मिक और संस्कृतिपूर्ण परिवार में हुआ, जहाँ संस्कृत और श्रीमद्भागवत पुराण का विशेष ज्ञान परंपरा से चला आ रहा है। उनके जन्म पर अनेक संत-महात्माओं ने उनके दिव्य गुणों को देखकर उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की भविष्यवाणी की। गौ सेवा इंद्रेश जी अपने जीवन में गौ सेवा और गौ पूजा को विशेष महत्व देते हैं तथा गौ माता की महिमा का निरंतर प्रचार करते हैं। उन्होंने अपना जीवन गौ सेवा को समर्पित किया है और अपने भजनों व वाणी के माध्यम से लोगों के हृदय में वृंदावन की भावना जागृत करते हैं।

इंद्रेश उपाध्याय - Shri Indresh Upadhyay
कैसी ये देर लगाई माँ दुर्गे - Kaisi Ye Der Lagai Maa Durge
कैसी ये देर लगाई माँ दुर्गे - Kaisi Ye Der Lagai Maa Durge
यह भजन माँ दुर्गा माता की शरणागति और भक्त की विनम्र प्रार्थना को दर्शाता है। इसमें भक्त अपनी कमजोरी स्वीकार करते हुए माँ से कृपा और सहारे की याचना करता है।
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे - Bhor Bhai Din Chad Gaya Meri Ambe
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे - Bhor Bhai Din Chad Gaya Meri Ambe
“भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे” एक प्रसिद्ध आरती भजन है, जो माता दुर्गा माता की महिमा और उनकी पूजा का वर्णन करता है। यह भजन प्रातःकालीन आरती और नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से गाया जाता है।
श्री सरस्वती माता आरती  - Shree Saraswati Mata Aarti
श्री सरस्वती माता आरती - Shree Saraswati Mata Aarti
यह माँ सरस्वती की आरती है। सरस्वती को विद्या, ज्ञान, वाणी और कला की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वे हंसवाहिनी, वीणावादिनी और श्वेतवस्त्रा रूप में पूजित हैं।
सभी आरती देखें →
श्री गिरिराज चालीसा - Shree Giriraj Chalisa
श्री गिरिराज चालीसा - Shree Giriraj Chalisa
श्री गोवर्धन चालीसा ब्रजधाम के पावन गोवर्धन पर्वत की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन है। गोवर्धन पर्वत को भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने इन्द्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए इसी गिरिराज को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण किया था। यह चालीसा गिरिराज जी की पूजा, उनकी कृपा, और ब्रजवासियों पर हुए उनके उपकारों का स्मरण कराती है। ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व है।
श्री जगन्नाथ चालीसा - Shree Jagannath Chalisa
श्री जगन्नाथ चालीसा - Shree Jagannath Chalisa
यह “श्री जगन्नाथ चालीसा” भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा, करुणा और भक्तवत्सल स्वरूप का विस्तार से वर्णन करती है। दोहा और चौपाई छंद में रचित यह चालीसा भगवान के धाम, उनकी रथ यात्रा, तथा भक्तों पर की गई विशेष कृपा का सुंदर वर्णन प्रस्तुत करती है। इसका पाठ विशेष रूप से रथ यात्रा, आषाढ़ मास, गुरुवार, तथा श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धा से किया जाता है।
श्री गंगा चालीसा - Shree Ganga Chalisa
श्री गंगा चालीसा - Shree Ganga Chalisa
गंगा चालीसा माँ गंगा के पावन रूप, उनके धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व का सुंदर स्तवन है। यह चालीसा माँ गंगा की लीलाओं, उनकी पवित्रता और भक्तों पर कृपा का वर्णन करती है। इसमें उनके तीर्थों, जलधाराओं और धर्म-रक्षा करने वाले कार्यों का विशेष उल्लेख है। इसे पढ़ने से भक्तों के हृदय में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।
सभी चालीसा देखें →
दूर नगरी बड़ी दूर नगरी - Dur Nagari Badi Dur Nagari
Krishna bhajan
5 Jun 2026

दूर नगरी बड़ी दूर नगरी - Dur Nagari Badi Dur Nagari

परिचय यह अत्यंत मधुर और प्रेमरस से परिपूर्ण राधा-कृष्ण भजन गोपी और श्रीकृष्ण के मधुर संवाद एवं प्रेम भाव का सुंदर चित्रण करता है। इस भजन में गोपी अपने प्रिय कन्हैया से मिलने की उत्कट इच्छा व्यक्त करती है, लेकिन गोकुल की दूरी, लोकलाज और मार्ग की कठिनाइयों के कारण अपने मन की व्यथा भी प्रकट करती है। भजन की प्रत्येक पंक्ति में ब्रज की सरलता, प्रेम की मधुरता और श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों की गहरी अनुरक्ति दिखाई देती है। कभी गोपी रात में आने से डरती है, तो कभी दिन में लोगों की नजरों से संकोच करती है। यह भाव भक्त और भगवान के बीच के प्रेम को अत्यंत सरल और मनोहारी रूप में प्रस्तुत करता है। यह भजन केवल सांसारिक मिलन का वर्णन नहीं बल्कि आत्मा की परमात्मा से मिलने की तड़प और भक्ति की गहन भावना का प्रतीक भी है। भावार्थ इस भजन में गोपी श्रीकृष्ण से कहती है कि उनकी गोकुल नगरी बहुत दूर है और वहाँ पहुँचने में उसे अनेक संकोच और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वह कभी रात के अंधकार से डरती है तो कभी दिन में लोगों की बातों से लज्जित होती है। गोपी का मन श्रीकृष्ण से मिलने के लिए अत्यंत व्याकुल है, लेकिन प्रेम के साथ-साथ उसमें विनम्रता और संकोच भी है। वह कहती है कि यदि सखियों के साथ आए तो शर्म आती है और अकेली आए तो रास्ता भूल जाने का भय लगता है। अंत में यह भजन प्रेम की उस मधुर अवस्था को दर्शाता है जहाँ भक्त अपने आराध्य से मिलने के लिए हर कठिनाई सहने को तैयार रहता है। यह राधा-कृष्ण प्रेम और ब्रजभाव की अत्यंत सुंदर अभिव्यक्ति है।

संसों की माला पे सिमरू मैं राधे श्याम - Sanso Ki Mala Pe Simru Main Radhe Shyam
Krishna bhajan
5 Jun 2026

संसों की माला पे सिमरू मैं राधे श्याम - Sanso Ki Mala Pe Simru Main Radhe Shyam

परिचय यह भजन राधा-कृष्ण के नाम-स्मरण की महिमा और प्रेम-भक्ति की गहराई को अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में व्यक्त करता है। इसमें भक्त की वह अवस्था दिखाई गई है, जब उसका मन पूरी तरह प्रभु के नाम में लीन हो जाता है और सांसों के साथ-साथ “राधे-श्याम” का स्मरण चलता रहता है। “सांसों की माला” एक सुंदर प्रतीक है—जैसे माला के हर दाने पर नाम जपा जाता है, वैसे ही हर सांस के साथ प्रभु का स्मरण करना ही सच्ची भक्ति है। जब यह भक्ति गहरी हो जाती है, तो संसार की मोह-माया अपने आप दूर लगने लगती है और भक्त का मन केवल भगवान में ही रम जाता है। भावार्थ इस भजन का मुख्य भाव नाम-स्मरण, प्रेम और पूर्ण समर्पण है। भक्त कहता है कि अब उसका जीवन केवल राधे-श्याम के नाम में ही बीत रहा है, और सांसारिक बातों से उसका कोई विशेष संबंध नहीं रह गया है। “प्रेम के रंग में ऐसी डूबी” यह दर्शाता है कि भक्त पूरी तरह प्रेम-भक्ति में रंग चुका है, जहां उसका अपना अस्तित्व भी भगवान में मिल गया है। “आप बनी मैं स्वरूप” का अर्थ है कि भक्त और भगवान के बीच का भेद समाप्त हो गया है।

काली कमली ने ऐसा रंग डाला - Kaali Kamli ne Aisa Rang Daala
Krishna bhajan
5 Jun 2026

काली कमली ने ऐसा रंग डाला - Kaali Kamli ne Aisa Rang Daala

परिचय यह अत्यंत मधुर और प्रेमरस से भरा श्रीश्याम भजन भगवान श्रीकृष्ण के सांवरे स्वरूप और उनकी मोहिनी अदाओं का सुंदर वर्णन करता है। इस भजन में भक्त श्रीकृष्ण के श्याम रंग, उनकी काली कमली और उनकी आकर्षक चितवन के प्रभाव को प्रेमपूर्वक व्यक्त करता है। भजन में बताया गया है कि श्रीकृष्ण का श्याम रंग ऐसा दिव्य और अलौकिक है कि उसके आगे संसार के सभी रंग फीके पड़ जाते हैं। उनकी टेढ़ी चितवन, मनमोहक मुस्कान और प्रेम भरी दृष्टि भक्त के हृदय को पूरी तरह अपने रंग में रंग देती है। यह भजन माधुर्य भक्ति और कृष्ण प्रेम की अद्भुत अनुभूति कराता है। इसमें भक्त का हृदय श्रीकृष्ण के प्रेम में इतना डूब जाता है कि उसे संसार के अन्य सभी आकर्षण तुच्छ प्रतीत होने लगते हैं। भावार्थ इस भजन में भक्त कहता है कि श्रीकृष्ण की काली कमली और उनका श्याम रंग इतना अद्भुत है कि एक बार जो उस प्रेम रंग में रंग जाता है, फिर संसार का कोई अन्य रंग उसे आकर्षित नहीं कर सकता। भक्त श्रीकृष्ण की टेढ़ी चितवन, उनकी सुंदर अदाओं और कजरारे नेत्रों का वर्णन करते हुए कहता है कि उनकी एक नजर ने उसके मन को पूरी तरह मोहित कर लिया है। अंत में भक्त स्वीकार करता है कि श्रीकृष्ण के प्रेम का रंग ऐसा चढ़ा कि संसार के सभी रंग मिट गए और केवल श्याम रंग ही उसके जीवन में बस गया। यही इस भजन का मुख्य भाव है।

जोगी रंग भी नाया - Jogi Rang Bhi Naya
Krishna bhajan
4 Jun 2026

जोगी रंग भी नाया - Jogi Rang Bhi Naya

परिचय यह अत्यंत रहस्यमयी और रसपूर्ण भजन श्रीकृष्ण के जोगी स्वरूप और उनकी मोहिनी छवि का सुंदर वर्णन करता है। इस भजन में भगवान श्रीकृष्ण को एक ऐसे अलौकिक जोगी के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनकी छवि, वेशभूषा और मधुर स्वर समस्त ब्रज को मोहित कर देते हैं। भजन में श्रीकृष्ण के अलकों, चंदन तिलक, कुंडलों, पिताम्बर और उनके अद्भुत श्रृंगार का अत्यंत काव्यमय वर्णन किया गया है। उनके स्वरूप में शिव और कृष्ण दोनों के दिव्य भावों की झलक दिखाई देती है, जिससे यह भजन और भी अद्वितीय बन जाता है। यह भजन भक्त के हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, आकर्षण और आत्मिक आनंद की अनुभूति उत्पन्न करता है। इसमें राधा नाम का स्मरण और ब्रज की माधुर्य लीला का भी सुंदर समावेश है। भावार्थ इस भजन में भक्त श्रीकृष्ण के जोगी रूप का वर्णन करते हुए कहता है कि उनका अलौकिक श्रृंगार और दिव्य स्वरूप संसार के सभी रंगों से श्रेष्ठ है। उनकी अलकें गंगा की धारा जैसी प्रतीत होती हैं और उनका चंदन तिलक अत्यंत मनोहर लगता है। भक्त उनके कुंडलों, पिताम्बर और अंग-अंग के आभूषणों की शोभा का वर्णन करते हुए कहता है कि उनकी छवि देखकर मन आनंद और भक्ति में डूब जाता है। अंत में भक्त कहता है कि श्रीकृष्ण का “राधे-राधे” नाम उच्चारण और उनका मोहक मंत्र पूरे ब्रज को प्रेमरस में डुबो देता है। यही इस भजन का मुख्य भाव है।

नैनन में ही राखूँ पिया तोहे - Nainan Mein hi Rakhu Piya Tohe
Krishna bhajan
4 Jun 2026

नैनन में ही राखूँ पिया तोहे - Nainan Mein hi Rakhu Piya Tohe

परिचय यह अत्यंत मधुर और प्रेममयी कृष्ण भजन भक्त और भगवान श्रीकृष्ण के गहरे आत्मिक प्रेम का सुंदर चित्रण करता है। इस भजन में भक्त अपने प्रियतम श्रीकृष्ण को अपने नयनों में बसाकर रखने की इच्छा व्यक्त करता है। उसके लिए संसार का प्रत्येक सुख और वैभव प्रभु की एक झलक के सामने तुच्छ प्रतीत होता है। भजन में भक्त की प्रेममयी भावना अत्यंत सरल और गहन रूप में प्रकट होती है। वह चाहता है कि श्रीकृष्ण की सांवली छवि सदैव उसकी आँखों और हृदय में बनी रहे। उनके अधरों की मधुरता, उनके रूप की मोहकता और उनके प्रेम का रस भक्त के जीवन का आधार बन जाता है। यह भजन माधुर्य भक्ति का सुंदर उदाहरण है, जिसमें भक्त अपने आराध्य के प्रेम में पूर्ण रूप से डूब जाता है और संसार से विरक्त होकर केवल प्रभु के सान्निध्य की कामना करता है। भावार्थ इस भजन में भक्त श्रीकृष्ण से प्रार्थना करता है कि वह उन्हें अपने नयनों में सदा के लिए बसाकर रखना चाहता है। प्रभु की एक झलक ही उसके लिए पूरे संसार के सुखों से बढ़कर है। भक्त कहता है कि वह श्रीकृष्ण के सांवले स्वरूप और उनके अधरों के अमृतमय रस का अनुभव करना चाहता है। उनके प्रेम में डूबकर उसे किसी अन्य विषय में रुचि नहीं रह जाती। अंत में भक्त यह व्यक्त करता है कि प्रभु और भक्त के मधुर मिलन की अनुभूति इतनी गहरी और दिव्य है कि उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। यही इस भजन का मुख्य भाव है।

सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है - Saare Jahan Ke Malik Tera Hi Aasara Hai
Ram bhajan
4 Jun 2026

सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है - Saare Jahan Ke Malik Tera Hi Aasara Hai

परिचय यह अत्यंत भावपूर्ण और आत्मसमर्पण से भरा भजन परमात्मा के प्रति पूर्ण विश्वास, श्रद्धा और स्वीकार भाव को प्रकट करता है। भजन में भक्त ईश्वर को समस्त संसार का स्वामी मानते हुए कहता है कि उसका एकमात्र सहारा केवल वही प्रभु हैं। जीवन में सुख आए या दुःख, सफलता मिले या कठिनाई — हर परिस्थिति को प्रभु की इच्छा मानकर स्वीकार करना ही सच्ची भक्ति है। भजन के शब्द मनुष्य को यह प्रेरणा देते हैं कि ईश्वर हमारी हर स्थिति, हर पीड़ा और हर भावना को बिना कहे समझते हैं। भक्त अपने जीवन की मजबूरियों, दुःखों और संघर्षों को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है और उनकी इच्छा में ही अपनी खुशी खोज लेता है। सरल भाषा और गहरे आध्यात्मिक भावों से भरा यह भजन मन को शांति, धैर्य और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास से भर देता है। भावार्थ इस भजन में भक्त कहता है कि संसार में उसका सबसे बड़ा सहारा केवल परमात्मा हैं और वही उसके जीवन का आधार हैं। भक्त प्रभु की हर इच्छा को स्वीकार करते हुए कहता है कि जो कुछ भी उसके जीवन में घट रहा है, वह सब भगवान की रज़ा से ही हो रहा है। इसलिए वह हर परिस्थिति में संतोष और समर्पण का भाव रखता है। भजन यह भी बताता है कि भगवान अपने भक्त के मन की हर बात जानते हैं। भक्त चाहे अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त न कर पाए, फिर भी प्रभु उसकी हर मजबूरी और हर भावना को समझते हैं। जीवन में आने वाले दुःख और सुख दोनों को ईश्वर की कृपा मानकर स्वीकार करना ही सच्चे भक्त का गुण है। अंत में भक्त भगवान से कोई शिकायत नहीं करता, बल्कि इस बात के लिए भी उनका धन्यवाद करता है कि उन्होंने उसे इस संसार में भेजा और अपने स्मरण का अवसर दिया। यह भजन पूर्ण समर्पण, धैर्य, संतोष और प्रभु की इच्छा में प्रसन्न रहने का सुंदर संदेश देता है।

Shri Jagannatha Temple - Hauz Khas New Delhi
नवीनतम मंदिर

Delhi

Shri Jagannatha Temple - Hauz Khas New Delhi

नई दिल्ली के हौज खास में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, मंदिर का इतिहास, स्थान और धार्मिक महत्व Re…

Baidyanath Jyotirlinga Temple Deoghar

Jharkhand

Baidyanath Jyotirlinga Temple Deoghar

झारखंड के देवघर में स्थित श्री बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, स्थान और धार्मिक महत्व Reviving C…

Kedarnath Jyotirlinga Temple Rudraprayag Uttarakhand

Uttarakhand

Kedarnath Jyotirlinga Temple Rudraprayag Uttarakhand

उत्तराखंड में स्थित श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, यात्रा विवरण, स्थान और धार्मिक महत्व Re…

Rameshwaram Jyotirlinga Temple Ramanathapuram

Tamil Nadu

Rameshwaram Jyotirlinga Temple Ramanathapuram

तमिलनाडु में स्थित श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, स्थान और धार्मिक महत्व Reviving Culture…

Dakshineswar Kali Temple Kolkata

West Bengal

Dakshineswar Kali Temple Kolkata

कोलकाता में स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, इतिहास और धार्मिक महत्व Reviving Cultures पर जानें।

कालचक्र का रहस्य: चातुर्मास, अधिकमास (मलमास) और वैदिक समय गणना का श्रीमद्भागवत दृष्टिकोणKalachakra
31 May 2026

कालचक्र का रहस्य: चातुर्मास, अधिकमास (मलमास) और वैदिक समय गणना का श्रीमद्भागवत दृष्टिकोण

श्रीमद्भागवत के अनुसार कालचक्र, चातुर्मास, अधिकमास (मलमास), 13 मास, 6 ऋतुएँ और वैदिक समय गणना का गहन आध्यात्मिक रहस्य जा…

पद्मिनी एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथाekadashi
25 May 2026

पद्मिनी एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा

पद्मिनी एकादशी 2026 का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व और मोक्ष प्राप्ति का आध्यात्मिक र…

वृषभ संक्रांति पर यह दान करकर आप सूर्यदेव को प्रसन्न कर सकते हैVrishabh Sankranti
14 May 2026

वृषभ संक्रांति पर यह दान करकर आप सूर्यदेव को प्रसन्न कर सकते है

वृषभ संक्रांति के शुभ अवसर पर सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए कौन-कौन से दान करना शुभ माना जाता है, जानिए इसका धार्मिक म…

त्रिशूर पूरम - त्योहार जिसमें हाथी सोने से ओर आकाश आतिशबाजी से आजtrishur pooram
12 May 2026

त्रिशूर पूरम - त्योहार जिसमें हाथी सोने से ओर आकाश आतिशबाजी से आज

केरल का प्रसिद्ध त्रिशूर पूरम उत्सव अपने सजे हुए हाथियों, रंग-बिरंगी छतरियों, पारंपरिक वाद्य संगीत और शानदार आतिशबाजी के…

12 ज्योतिर्लिंग का रहस्य: क्यों माने जाते हैं भगवान शिव के सबसे पवित्र धाम12 Jyotirlinga
10 May 2026

12 ज्योतिर्लिंग का रहस्य: क्यों माने जाते हैं भगवान शिव के सबसे पवित्र धाम

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में माने जाते हैं। जानिए 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम, स्थान,…

अपरा एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथाekadashi
9 May 2026

अपरा एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा

अपरा एकादशी 2026 का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व और मोक्ष प्राप्ति का आध्यात्मिक रहस्…

क्या पिंडदान से सच में मिलती है मुक्ति? जानिए भागवत का रहस्यbhagavatam
7 May 2026

क्या पिंडदान से सच में मिलती है मुक्ति? जानिए भागवत का रहस्य

क्या पिंडदान से सच में मिलती है मुक्ति? जानिए भागवत का रहस्य ? इस श्लोक में बताया गया है कि श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पि…

मोहिनी एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथाekadashi
25 Apr 2026

मोहिनी एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा

मोहिनी एकादशी 2026 का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व और मोक्ष प्राप्ति का आध्यात्मिक रह…

षष्ठ ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर (महाराष्ट्र): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातेंjyotirling
20 Apr 2026

षष्ठ ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर (महाराष्ट्र): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

महाराष्ट्र के सह्याद्रि पर्वत में स्थित हिंदुओं का एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है, भीमाशंकर धाम जिसे षष्ठ ज्योतिर्लिंग क…

अक्षय तृतीया को यह सब करने से जाग सकती है किस्मतakshaya tritiya 2026
16 Apr 2026

अक्षय तृतीया को यह सब करने से जाग सकती है किस्मत

अक्षय तृतीया के दिन किए गए विशेष उपाय और पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। जानिए इस शुभ दिन क्या …